Homeदेश >> मेरी कलम : भावनाओं की अभिव्यक्ति - भावना सलिल लाम्बा

मेरी कलम : भावनाओं की अभिव्यक्ति - भावना सलिल लाम्बा

shadow

मेरी कलम : भावनाओं की अभिव्यक्ति

मैं ऐसा महसूस करती हूं कि  इंसान मौन रहकर भी बहुत कुछ बोल सकता है। हमारे आसपास कई ऐसे आम लोग होते हैं जो सौंदर्य,  रूप की ओर ही आकर्षित होते हैं l एक साधारण व्यक्ति के मन को पढ़ने व उनकी खासियत से सरोकार नहीं होता। पहचानने  का प्रयत्न ही नहीं करते l जिनमें ईश्वरीय प्रदत या हादसों की वजह से जो क्षति होती है l उसे देखकर रिश्ता बनाने की कोशिश ना करते हुए उसे हमेशा उसकी कमी का एहसास कराते हैं। कभी-कभी भाग्यवश हम ऐसी ही किसी शख्सियत से टकरा जाते हैं कि तब पता चलता है कि कीचड़ में से कमल कैसे खिलता है। हाल ही में मैं अहमदाबाद एक एग्जीबिशन देखने गई नाम था "अभिव्यक्ति"। जहां मेरा परिचय एक ऐसी महिला से हुआ जो गुणों से भरपूर  हैं।  उनकी व मेरी चर्चा में मुझे बेहद समानता लगी। जो हमारी बहुत बड़ी सामाजिक समस्या है।  हमारा सभ्य समाज प्रथम दृष्टि में व्यक्ति को सौंदर्यवान, रूपवान होने में आकर्षित होता है। आडंबरों से भरा समाज व्यक्ति के गुणों की कद्र नहीं करता। प्रश्न उठता है कि कहाँ जा रहा है समाज? विचार यह भी आता है कि शिक्षित होने का क्या अर्थ है?  इसके लिए क्या हमारे संस्कार दोषी हैं? यह मुद्दा प्रश्न बनकर इसीलिए भी खड़ा होता है कि हम दोषी हैं उनके जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं या हादसों ने उनका रूप छीन लिया और समाज ने उन्हें अवसाद से ग्रसित कर दिया। जब मेरी चर्चा उनसे शुरू हुई तो मैं प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी । उन्होंने प्रेरणा दी कि निराशा ही सब कुछ नहीं है l उस से उठकर आशा सब कुछ है। एक पत्थर साधारण होता है परंतु उसी पत्थर पर हम सिंदूर लगा दें तो वह पूजनीय हो जाता है l फर्क सिर्फ इतना सा ही है । मेरा विचार है कि जब हमें कोई ठोकर मारता है तो कहीं ना कहीं वह हमें प्रेरणा देता है कुछ अलग कर दिखाने की। यही मौन अभिव्यक्ति उनकी रचना दर्शाती है। मौन रहकर एक कलाकार कैसे अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करता है। उसका उदाहरण जो हमें जीने की प्रेरणा देता है।
मैं उन का संक्षेप में परिचय देना चाहूंगी-
उनका नाम-  जिगना विनोद भाई गैदाना
जन्म- अहमदाबाद, गुजरात
शिक्षा-  एम. ए. फाइन आर्ट्स, एम एस यूनिवर्सिटी बड़ौदा।
साथ ही उनकी कला जो मौन अभिव्यक्ति है उसे प्रेषित कर रही हूं वह स्वयं उदाहरण हैं।

- भावना सलिल लाम्बा

झाबुआ (मध्यप्रदेश)