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कविता : ऑक्सीजन - निवेदिता सक्सेना

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कविता : ऑक्सीजन

तुम नहीं तो कुछ नहीं, 

आज सोचते सोचते बात ध्यान आयी,

तुम बिन जीना असम्भव है,

जिंदगी में पैसा, शोहरत ,मजा सब बेकार है।

तुम नहीं तो दुनिया है ही नहीं,

ऐ मानव तुम क्यों बिखर बिखर रहे,

भूल गए क्या खो रहे हर पल यहां।

तुम नहीं तो कुछ नहीं ।।

फिर ध्यान आया, तुम ही तो सबकी मुख्य जीवन धारा हो।

तुमसे ही इंसान यहां, फिर तुम ना हो तो क्या,

चिकित्सा विज्ञान की कमी है क्या।

वेंटीलेटर की कमी नहीं

सब अच्छा होगा यह पर,

तुम नहीं तो कुछ नहीं ।।।

पैसा ही तो सब कुछ यहां,

तुम्हारी प्राकृतिक फैक्ट्री (वृक्ष) को 

खत्म भी कर भी दे तो क्या।

पैसे की कमी है क्या ????

ऐ मानव सच तो देखो ऑक्सीजन

बिना जीवन है क्या।।।

तुम नहीं O२ तो जीवन है क्या।

- निवेदिता सक्सेना

झाबुआ (मध्यप्रदेश)