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कविता : जल की व्यथा - सुषमा सिंह कर्चुली 

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कविता : जल की व्यथा 

मेरा आँचल मैला न करो,

मेरा जल जीवन का राग है मेरा जल .......

क्योंकि जल है तो जहान है। जल है तो......

कल कल करती लहरें मेरी

नित-नित मर-मर जी रहीं जलचर ,

जलीय वनस्पती भी मौत की नींद सो रहीं

आओ मिलकर इन्हें बचाएं ये नदियों का श्रंगार हैं ये.......

मुझसे ही हैं गंगा, यमुना, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा,

हरे-भरे वन रहे सुरक्षित, विचरण करें यहां पशु पक्षी ,

आओ मिलकर इन्हें बचाओ, ताकि बहती रहे निर्मल जल-धारा.......

दोने-पत्तल,पन्नी,अश्थियाँ

नदियों में पशुओं को नहलाना

मल-मूत्र,कचरा,रसायन बहाकर

मुझको दूषित न करो

क्योंकि जल है,तो जहान है।

मेरा जल जीवन का राग है।

मेरा जल........ मेरा आँचल........

- सुषमा सिंह कर्चुली 

सिहोरा (जबलपुर)(मध्यप्रदेश)